Tuesday, June 14, 2016

Teesra Morcha

तीसरा मोरचा 

लत्तम जुत्तम, दे  दनादन
स्वार्थ और आरोपों से स्याह नेतागण
किसी को मिला साथ, तो किसी को धोखा है
लो भैया, बन गया 'तीसरा मोरचा' है

इसको तोड़ा, उसको फोड़ा
भानुमती का कुनबा जोड़ा
येन-केन प्रकारेण सत्ता पाने की सोचा है
लो भैया, बन गया 'तीसरा मोरचा' है

'मुलायम' ने प्रधानमंत्री बनने की ठानी
पर 'लालू' ने उनकी एक ना मानी
आदतन 'नीतीश' ने दिया फिर से धोखा है
लो भैया, बन गया 'तीसरा मोरचा' है

'ममता' और 'लेफ्ट' एक साथ ना रहेंगे
'करूणानिधि' भी 'अम्मा' को ना सहेंगे
यूपी में भी 'मुलायम' और 'माया' का यही लोचा है
लो भैया, बन गया 'तीसरा मोरचा' है

'टीआरएस' और 'बीजेडी' अपने में मगन हैं
आंध्रा में भरोसे का ना 'जगन' है
'देवेगौड़ा' और 'अब्दुल्ला' को वक़्त ने ही किया छोटा है
लो भैया, बन गया 'तीसरा मोरचा' है

बाहर से समर्थन देने की पीड़ा सह रहे
'कांग्रेसी' बिचारे छाती पीट कह रहे
बीजेपी को बाहर रखने का गवायाँ फिर से मौका है
लो भैया, बन गया तीसरा मोरचा है 

Monday, January 19, 2015

Kuchh tum kaho, Kuchh hum kahein

कुछ तुम कहो, कुछ हम कहें 

तुम कहते हो कि, देश है अंधकार में
और सरकार कंपनियों के आगे बिकी है
मैं कहता हूँ कि धीरज धरो, वक़्त है बाँकी
उम्मीदों पर ही तो दुनिया टिकी है

तुम कहते हो कि,
नहीं हुई गंगा सफाई अब तक
मैं कहता हूँ कि,
अलख जगाई तो है

तुम कहते हो कि,
नहीं आया कला धन वापस
मैं कहता हूँ कि,
'SIT'  बनाई तो है

तुम कहते हो कि,
घट रहा लहर अब तो
मैं कहता हूँ कि,
कई राज्यों में सरकार बनाई तो है

तुम कहते हो कि,
नहीं बना भारत विश्व-गुरु अब तक
मैं कहता हूँ कि,
'योग दिवस' दिलाई तो है

तुम कहते हो कि,
भारत नहीं बना मैन्युफैक्चरिंग हब अब तक 
मैं कहता हूँ कि,
'मेक इन इंडिया' चलाई तो है

तुम कहते हो कि,
नहीं हुआ 'GST' अब तक 
मैं कहता हूँ कि,
प्रयास जारी तो है

तुम कहते हो कि,
नहीं आया बाज पाकिस्तान अब तक 
मैं कहता हूँ कि,
अपना 'BSF' उनके  'Rangers' पर भारी तो है

 तुम कहते हो कि,
नहीं हुआ सब्सिडी दुरूपयोग कम
मैं कहता हूँ कि,
'PAHAL'  चलाई तो है

सभी कहते हैं कि,
अब चुप हो जा, बहुत हो गया
मैं कहता हूँ कि,
अभी ही आग लगाई तो है


 KUCHH TUM KAHO, KUCHH HUM KAHEIN

tum kahte ho ki bhavishya hai andhkar mein
aur sarkar samasyaon ke aage jhuki hai
main kahta hun ki dheeraj dharo, waqt hai baanki
ummid par hi duniya tiki hai

tum kahte ho ki
nahi hui ganga safai ab tak
main kahta hun ki
alakh jagai to hai
tum kahte ho ki
nahi aaya kala dhan wapas
main kahta hun ki
'SIT' banai to hai
tum kahte ho ki
nahi hua sabsidy ka durupyog kam
main kahta hun ki
'PAHAL' chalayi to hai
tum kahte ho ki
ghat rahi lahar ab to
main kahta hun ki
kai rajyon mein sarkar banai to hai
tum kahte ho ki
nahi bana bharat vishwa guru ab tak
main kahta hun ki
'YOGA DIWAS' dilwayi to hai
tum kahte ho ki
bharat nahi bana manufacturing hub ab tak
main kahta hun ki
'Make in India' chalwayi to hai
tum kahte ho ki
nahi hua 'GST' ab tak
main kahta hun ki
prayas jari to hai
tum kahte ho ki
nahi aaya baaj pakistan ab tak
main khata hun ki
apna 'BSF' unke 'Rangers' par bhari to hai

Tuesday, June 4, 2013

गरीब का बच्चा

गरीब का बच्चा 

दिन में परिश्रम या याचना से, 
दो जून की रोटी जोड़ लेता है
रात में धरती को मान बिछावन,
आसमान ओढ़ लेता है।
हवा माँ बनकर,
जिसके बदन को थपथपाती है।
जुगनू भी जिसके कानों में
लोड़ी गुनगुनाती है।

अर्थ, सामर्थ्य और आश्रय से वंचित, 
जीवन में मिले दुखों का अर्जित,
सकल अभावों की पीड़ा में भी,
जिसका ज़मीर अभी तक सच्चा है।
ये जिसकी कहानी है,
वो एक गरीब का बच्चा है।

बाप बंधुआ मजदूरी कर,
शाम में दारु पी कर आता है।
दिन भर मालिक की गालियाँ सुन,
भट्ठे पर कुछ पल जी कर आता है।
मां रसोई के खाली कनस्तरों में
रोज़ उम्मीदें ढूंढती है।
औरों को खिला, बचा-खुचा खुद खाकर, 
जीवन से झूझती है।

पूस की रात है,
कड़ाके की ठंड है।
कंपकपाती सर्दी और
लाचार गरीबी की जंग है।
मां के मैले आँचल में 
खुद को छिपा सोया ये मलंग है।
एक गरीब के बच्चे को हरा ना पाने पर
कुदरत भी दंग है।

सावन की बरसात और
बाढ़ से मचा हाहाकार है।
मां कही जाने वाली नदियों ने भी
लिया महाकाल का अवतार है।
चहुँ-ओर महामारी, दुःख, विलाप
और चीत्कार है।
पर घनघोर बारिश में खेलते
इस बच्चे की खिलखिलाहट, प्रकृति को ललकार है। 

झेठ की दुपहरी और
घरों में दुबकी मानवता है।
लू के थपेड़ों से परेशान
सारी जनता है।
सूनी सड़कों और सूनी गलियों को देख
दंभ में कुदरत हँसता है।
पर ऐसे मौसम में भी इस बच्चे को
नंग-धडंग धूल में लोटते देख, वो भी चिढ़ता है।

ना शिकवा जहान से, ना शिकायत भगवान् से, 
ना वेद-कुरान का झगडा, ना ईर्ष्या धनवान से,
भुखमरी और अभावों के अलावा 
जिसके जीवन में कुछ नहीं बचा है।
ये जिसकी कहानी है,
वो एक गरीब का बच्चा है।


Gareeb ka bachcha

din mein parishram ya yachna se 
do june ki roti jod leta hai
raat mein dharti ko maan bichhawan
aasmaan odh leta hai
hawa maan bankar 
jiske badan ko thapthapati hai
jugnu bhi jiske kaano mein
lodi gungunati hai

arth, saamarthya aur aashraya se vanchit
jeevan mein mile dukho ka arjit
sakal abhaavon ki peeda mein bhi
jiska zameer abhi tak sachcha hai
ye jiski kahani hai
wo ek gareeb ka bachcha hai

baap bandhua mazdoori kar
sham mein daru pee kar aata hai
din bhar maalik ki gaaliyan sun
bhatte par kuchh pal jee kar aata hai
maan rasoi ke khali kanastaron mein
roz ummidein dhhondhti hai
auro ko khila, bacha-khucha khud khakar
jeevan se jhojhti hai

poos ki raat hai
kadake ki thand hai
kanpkapati sardi aur
gareebi ki jung hai
maan ke maile aanchal mein 
khud ko chhipa soya ye malang hai
ek gareeb ke bachche ko hara na paane par
kudrat bhi dang hai

saawan ki barasaat aur
baadh se macha hahakaar hai
maan kahi jaane wali nadiyon ne bhi
liya mahakaal ka avtaar hai
chahun-or mahamaari, dukh, vilaap
aur chtkaar hai
par ghanghor baarish mein khelte
is bachche ki khilkhilahat, prakriti ko lalkaar hai

jheth ki dupahri aur
gharon mein dubki maanavta hai
lu ke thapedon se pareshan
saari janta hai
sooni sadkon aur sooni galiyon ko dekh
dambh mein kudrat hansta hai
par aise mausam mein bhi is bachche ko
nang-dhadang dhool mein lotte dekhkar wo chidhta hai

na shikwa jahaan se, na shikayat bhagwaan se 
na ved-kuraan ka jhagda, na irshya dhanwaan se
bhookhmari aur abhawon ke alawa 
jiske jeevan mein kuchh nahi bacha hai
ye jiski kahani hai
wo ek gareeb ka bachcha hai

Sunday, April 1, 2012

Watan Ki Yaad

वतन की याद

वैभव-विलास की मीठी धूप पर,
घनघोर घटा स्मृति की छाई
पश्चिम की धरती पर,
मुझे याद अपने वतन की आई

अमेरिका ने दिया बहुत कुछ,
कृतघ्न नहीं मैं बन सकता
पर सोने की ज़ंजीर से बंधा,
कब तक  भला मैं रह सकता
गरीब कीतनी ही हो मां फिर भी,
वो ममता कहीं नहीं मिल सकती
मिट्टी की खुशबू जो घुली है आत्मा में,
वो कभी नहीं छिन सकती

सूर्योदय के साथ गूंजते हनुमान चालीसा के दोहे,
वो धोबी घाट की पट-पट और चिड़ियों की चीं-चीं कानों को सोहे
वो पंडित जी का राम-राम, वो मिर्ज़ा साहब का सलाम,
खेतों की पगडंडियों से कंधे पर हल ले जाता किसान
वो आँगन में धूप सेंकते बच्चे, वो अलाव के चहुँ-ओर वैठे लोअग
वो अतिथि को भगवान् मानना, वो भोजन में परोसा जाता छप्पन भोग
वो हर समस्या में 'जुगाड़' लगाना, वो हर बीमारी का प्राकृतिक उपचार
वो बिन मांगे लोगों का सलाह देना, वो झगड़ों के बाद भी बना रहना संयुक्त परिवार
वो सड़कों में पड़े गड्ढे, वो गाडी का हिचकोले खाते चलना
वो उंघती अनमनी सी दुपहरिया, वो शाम में सूरज का नदी किनारे ढलना

नहीं भूलता कोई हिन्दुस्तानी इन्हें, यही तो हमारी धरोहर है
सर्वधर्म समभाव और गंगा जमुना संस्कृति का सरोवर है
गर्व है अपनी मातृभूमि पर,जहां भारत अभी भी इंडिया पर भारी है
हे सभ्यता, हे संस्कृति, ये देश तेरा आभारी है


Watan ki Yaad

vaibhav-vilaash ki meethi dhoop par,
ghanghor ghata smriti ki chhayi
paschim ki dharti par,
mujhe yaad apne watan ki aayi

America ne diya bahut kuchh,
kritaghn nahi main ban sakta
par sone ki zanjeer se bandha,
kab tak bhala main rah sakta
garib kitni ho maan phir bhi,
wo mamta kahin nahi mil sakti
mitti ki khushboo jo ghuli hai aatma mein,
wo kabhi nahi chhin sakti

Sooryodaya ke saath goonjte hanumaan chalisa ke dohe,
wo dhobi ghat ki pat-pat aur chidiyon ki chin-chin kaano ko sohe
wo pandit ji ki raam-raam, wo mirza saahab ka salaam
kheton ki pagdandiyon se kandhe par hal le jaata kisaan
wo aangan mein dhoop senkte bachhe, wo alaav ke chahun-or baithe log
wo atithi ko bhagwaan maanna, wo bhojan mein parosa jaata chhappan bhog
wo har samasya mein 'jugaad' lagaana, wo har bimari ka prakritik upchaar
wo bin maange logon ka salaah dena, wo jhagdon ke baad bhi bana rahna sanyukt pariwaar
wo sadkon mein pade gaddhe, wo gaadi ka hichkole khaate chalna
wo unghti anmani si dupahriya, wo shaam mein suraj ka nadi kinaare dhalna

nahi bhulta koi hindustani inhe, yahi to humari dharohar hai
sarv-dhrma sambhaav aur ganga-jamuna snskriti ka sarovar hai
garva hai apni matribumi par, jahan bharat abhi bhi india par bhari hai
he sabhyta, he snskriti, ye desh tera aabhaari hai

Saturday, October 16, 2010

Chand Se Baatein

चाँद से बातें

आज पूर्णिमा का चाँद,
दूर आसमान में बैठा,
अपने सफ़ेद और मद्धिम प्रकाश से,
मेरे कमरे को नहला रहा था
कभी पेड़ों के झुर-मुट,
कभी खिड़की से झाँक कर,
मुस्कुराता हुआ, अठखेलियाँ करता हुआ,
मेरे उदास मन को बहला रहा था

मन की उदासी भूलते हुए,
अपनी तन्हाई दूर करने के लिए,
कई बार मिन्नतें कर,
उसे मैंने अपने पास बुलाया
वो भी छोटे बच्चे की तरह,
खिलखिलाता हुआ,
छलांगे भरता हुआ,
मेरे बालकोनी में आया

फिर हम दोनों ने,
सारे ग़म भुला कर,
एक दूसरे के जीवन में झांक कर,
जम कर बात किया
हम से जुड़े हुए,
उन भूले-बिसरे यादों को,
जीवन के कुछ खोये हुए पलों को,
फिर से एक साथ किया

बचपन में उसके
शीतल छाया के नीचे,
नाव में बैठ कर,
गाँव की नदी पार करना
उसके ही शांत और
निर्मल उजाले में,
खेतों के बीच बने,
पतले पगडंडियों पर चलना

उसके स्नेह भरे
आवरण के नीचे,
चारपाई पर बैठकर,
नानी का हमे कहानियां सुनाना
उसके ही सफ़ेद
चादर के नीचे
मेरे शरीर को थपथपाते हुए,
लोड़ियाँ गाकर, मां का मुझे सुलाना

इन सभी यादों की
अनमोल मोतियों को,
हम दोनों ने मिल कर,
फिर से पिरोया
चाँद से बातें करते हुए
मुश्किल से मिले,
इन फुर्सत के लम्हों को,
मैंने खुल कर जिया

फिर से मेरे पास आकर,
सारे दुःख-दर्द भुला कर,
मुझसे बातें करने का वादा कर,
चाँद वापस फलक पर चला गया
दूसरों के दुःख दूर कर,
होठों पर उनके मुस्कान लाकर,
जीवन में आगे बढ़ते रहने का
अनमोल पाठ पढ़ा गया....

Chand se Baatein

aaj poornima ka chand,
door aasmaan mein baitha,
apne safed aur maddhim prakash se,
mere kamre ko nahla raha tha
kabhi pedon ke jhur-mutt,
kabhi khidki se jhaan kar,
muskurata hua, athkheliyan karta hua,
mere udaas man ko bahla raha tha

man ki udasi bhulte hue,
apni tanhai door karne ke liye,
kai baar minnten kar,
use maine apne paas bulaya
wo bhi chhote bachhe ki tarah,
khilkhilata hua,
chhalange bharta hua,
mere balcony mein aaya

phir hum dono ne,
saare gham bhula kar,
ek-dusre ke jeevan mein jhank kar,
jam kar baat kiya
hum se jude hue,
un bhule-bisre yaadon ko,
jeevan ke khoye hue palon ko,
phir se ek saath kiya

bachpan mein uske
sheetal chhaya ke neeche,
naav mein baithkar,
gaaon ki nadi paar karna
uske shant aur
nirmal ujaale mein,
kheton ke beech bane,
patle pagdandiyon par chalna

uske sneh bhare
aavran ke neeche,
charpai par baith kar,
naani ka hume kahaniayan sunana
uske hi safed
chadar ke neeche,
mere sharir ko thapthapate hue,
lodiyan gaakar, maan ka mujhe sulana

in sabhi yaadon ki
anmol motiyon ko,
hum dono ne milkar,
phir se piroya
chand se baatein karte hue
mushkil se mile,
in fursat ke lamhon ko,
maine khul kar jiya

phir se mere paas aakar,
saare dukh-dard bhula kar,
mujhse baatein karne ka waada kar,
chand waapas phalak par chala gaya
dusron ke dukh door kar,
hothon par unke muskaan laakar,
jeevan mein badhte rahne ka,
anmol paath padha gaya....

Friday, October 1, 2010

Mujhe Bhi Kabhi Pyar Hua Tha

मुझे भी कभी प्यार हुआ था 

नींद गयी, चैन गया
जीना तक दुस्स्वार हुआ था
क्या बताऊँ यारों
मुझे भी कभी प्यार हुआ था

बीस साल की उम्र का तो
तुमने देखा होगा अचम्भा
सुंदरियों की बात ना करो
कुरूप भी लगती थी रम्भा
हर रात सपने में थी
मेनका आती
गोद में रख सर हमारे
गाना गाकर हमे सुलाती
उस तरुनाई की अवस्था में ही
दिल पर मेरे, किसी की नज़रों का वार हुआ था
क्या बताऊँ यारों
मुझे भी कभी प्यार हुआ था

झलक उसकी एक पाने को
राहों पे नज़रें लगी रहती थी
वो तो चैन से सोती थी
आँखों में रातें, हमारी कटती थी
वही मेरी सब थी
उसके बिना, सूना संसार हुआ था
क्या बताऊँ यारों
मुझे भी कभी प्यार हुआ था

रोज़ सुबह छत पर वो
बाल बनाने आती थी
अपने बालों के गुच्छे में
दिल हमारा, बाँध ले जाती थी
जीवन कड़वा सा लगता था
जिस दिन ना उसका दीदार हुआ था
क्या बताऊँ यारों
मुझे भी कभी प्यार हुआ था

उसके तीखे नैनों और
मस्तानी चाल का था कायल मैं
उसकी मासूमियत और
शोख अदाओं पर था घायल मैं
उसके बारे में ही सोच - सोच
हर काम से लाचार हुआ था
क्या बताऊँ यारों
मुझे भी कभी प्यार हुआ था

वो भी मुझे देखकर मुस्कुराती थी
शर्माती थी, सकुचाती थी
बार - बार फ़ोन करने के बहाने
हमारे हॉस्टल के फ़ोन बूथ पर आती थी
उसके दिल में भी
मेरे लिए इश्क गुलज़ार हुआ था
क्या बताऊँ यारों
मुझे भी कभी प्यार हुआ था

इतने पर भी मैंने ना कभी
उस से इश्क का इज़हार किया
वो भी समझ गयी थी
चली गयी दूर, ना मेरा इंतज़ार किया
मेरी नाकामी के पीछे
विलेन मेरा डर और मेरा संस्कार हुआ था
क्या बताऊँ यारों
मुझे भी कभी प्यार हुआ था

Mujhe Bhi Kabhi Pyar Hua Tha

neend gayi, chain gaya
jeena tak dusswaar hua tha
kya bataun yaaron
mujhe bhi kabhi pyar hua tha

bees saal ki umra ka to
tumne dekha hoga achambha
sundariyon ki baat na karo
kuroop bhi lagti th rambha
har raat sapne mein thi
menka aati
goad mein rakh sir humare
gaana gaaker hume sulaati
us tarunai ki awastha mein hi
dil pe mere kisi ki nazron ka waar hua tha
kya bataun yaaron
mujhe bhi kabhi pyar hua tha

jhalak uski ek pane ko
raahon per nazrein lagi rehti thi
wo to chain se soti thi
aankhon mein raatein, humari katti thi
wahi meri sabh thi
uske bina soona sansaar hua tha
kya bataun yaaron
mujhe bhi kabhi pyar hua tha

roz subah chhat per wo
baal banane aati thi
apne baalon ke guchhe mein
dil humara baandh le jaati thi
jeevan kadwa sa lagta tha
jis din na uska deedaar hua tha
kya bataun yaaron
mujhe bhi kabhi pyar hua tha

uske teekhe nain aur
mastani chaal ka tha kaayal main
uski masoomiyat aur
shokh adaaon per tha ghaayal main
uske baare mein hi soch-soch
har kaam se laachaar hua tha
kya bataun yaaron
mujhe bhi kabhi pyar hua tha

wo bhi mujhe dekh ker muskurati thi
sharmati thi, sakuchati thi
baar-baar phone karne ke bahane
humare hostel ke phone booth per aati thi
uske dil mein bhi
mere liye ishq gulzaar hua tha
kya bataun yaaron
mujhe bhi kabhi pyar hua tha

itne per bhi maine
na kabhi us se ishq ka izhaar kiya
wo bhi samajh gayi thi
chali gayi door, na mera intezar kiya
meri naakaami ke pichhe
villain mera darr aur mera sanskaar hua tha
kya bataun yaaron
mujhe bhi kabhi pyar hua tha..

Monday, September 27, 2010

Menhga Ishq

मंहगा इश्क

एक सख्त बाप की सख्ती का
टायं-टायं फिस्स हो गया
उसी की बेटी शिखा का
किसी से इश्क हो गया
वो छोड़ा था पूरा मुम्बैया
नाम था उसका मिस्टर कन्हैया
एक दिन बड़े प्यार से उसने अपनी महबूबा से कहा की
तेरे घर के आगे एक घर बनाऊंगा शिखा
लड़की का बाप यह सुन बोल उठा की
बेटा घर बनाना तो दूर, पहले प्लाट तो ले के दिखा

Menhga Ishq

ek sakht baap ki sakhti ka
taany-taany fiss ho gaya
usi ki beti sikha ka
kisi se ishq ho gaya
wo chhoda tha poora mumbaiya
naam tha uska mister kanhaiya
ek din bade pyar se usne apni mehbooba se kaha ki
tere ghar ke aage ek ghar banaunga sikha
ladki ka baap yeh sun bol utha ki
beta ghar banana to door, pehle plot to le ke dikha

Sunday, September 26, 2010

Prabhat

प्रभात*

आदित्य उगा, अब हुआ प्रभात
नव - जीवन की है शुरुआत
अनिल अभी कुछ धीमा है
पंछी की ख़ुशी की नहीं सीमा है
स्वछंद विचरण करते हैं हवाओं में
चन्दन सी महक है फिजाओं में
पर मानव को संतोष नहीं
प्रकृति है उसका यह, दोष नहीं
सुबह उठकर कहते हैं, हे भगवान्,हे भगवती
कोई नाम लेता है गोपाल का, तो कोई कहता है, हे सरस्वती
सदियों से रहा है, मानव का प्रकृति से अटूट बंधन
ज्यों जीवों के लिए श्वांश और भौरों के लिए गुंजन..

*It is an experimental poem, where I have used names of my friends in my graduation days (including me). Our names are presented in italics...

Prabhat*

aditya ugaa, ab hua prabhat
nav-jeevan ki hai suruat
anil abhi kuchh dheema hai
panchhi ki khushi ki nahi seema hai
swachhand vicharan karte hain hawaon mein
chandan si mehek hai fizaon mein
per maanav ko santosh nahi
prakriti hai uska yeh, dosh nahi
subah uth ker kahte hain, he bhagwaan, he bhagwati
koi naam leta hai gopal ka, to koi kehta hai, he saraswati
sadiyon se reha hai, maanav ka prakriti se atoot bandhan
jyon jeevon ke liye shwaanssh, aur bhauron ke liye gunjan....

*It is an experimental poem, where I have used names of my friends in my graduation days (including me). Our names are presented in italics...

Saturday, September 18, 2010

ICICI mein Promotion

आईसीआईसीआई में प्रोमोसन 

एक बार किसी कारण से मरने के बाद,
एक बंदा नरक में आया
चित्रगुप्त ने उसका register देख कर,
यमराज को बताया
भगवन इस बन्दे ने
पुण्य से कहीं ज्यादा पाप किया है
पर अपने जीवन का पिछला तीन साल
icici को as a manager दिया है

यमराज ने कहा की, ये तो तुमने
इसका introduction दिया है
पर इसके मरने का कारण क्या है

प्रभु, ये बंदा अपने काम के प्रति काफी devoted था
इसीलिए ऑफिस में ही मृत पाया गया है
और मरने का कारण heart attack बताया गया है

इतना सुनकर यमराज ने उस बन्दे से कहा की
तू तो हट्टा कट्टा पहेलवान है
मासा अल्लाह, अभी जवान है
फिर तुझे heart attack  कैसे हो गया
थोड़ी देर सोने के उम्र में हमेशा के लिए सो गया
बन्दे ने कहा की भगवन,
आपको अपनी दुःख भरी कहानी सुनाता हूँ
एक horror story को poem के रूप में बताता हूँ

काफी गोरखधंधे और मेहनत के बाद
जब मैंने promotion लिया
अब तो आराम से रहूँगा
ये सोचकर चैन की सांस लिया
तभी बॉस का बुलावा आया
मैं उनके केबिन की ओर धाया
बॉस ने कहा की बेटा,
तुने promotion तो ले लिया है
पर अपने सर पर
कांटो का ताज रख लिया है
अब तुझे मुझसे एक वादा करना होगा
कुछ भी हो जाये, पर business सबसे ज्यादा करना होगा
इतना सुनते ही मेरा आराम करने का प्लान ब्रेक हो गया
और जब देखा अगला goal sheet , मुझे heart attack हो गया

ये सुनते ही यमराज ने कहा की,
तुने काफी कष्ट bulls-eye cycle* में सहा है
इसीलिए, अब तू नरक के दुःख का
entitle नहीं रहा है
जा स्वर्ग में जाकर मौज कर
सुख से तो जी ना सका, मरने के बाद तो सुख कर

*target period in ICICI Prudential

ICICI mein Promotion

ek baar kisi kaaran se marne ke baad,
ek banda narak mein aaya
chitragupt ne uska register dekh ker,
yamraj ko bataya
bhagwan, is bande ne punya se kahi jyada
paap kiya hai
per apne jeewan ka pichhla teen saal
icici ko as a manager diya hai

yamraj ne kaha ki,
ye to tumne iska introduction diya hai
per iske marne ka kaaran kya hai

prabhu, ye banda apne kaam ke prati kaafi devoted tha
isiliye office mein hi mrit paya gaya hai
aur marne ka kaaran heart attack bataya gaya hai

itna sunker, yamraj ne us bande se kaha ki
tu to hatta katta pehlwan hai
maasa allah abhi jawan hai
phir tujhe heart attack kaise ho gaya
thori der sone ke umar mein hamesha ke liye so gaya
bande ne kaha ki bhagwan,
aapko apni dukh bhari kahani sunata hun
ek horror story ko poem ke roop mein batata hun

kaafi gorakhdhandhe aur mehnet ke baad
jab maine promotion liya
ab to aaraam se rahunga,
ye sochker chain ki saans liya
tabhi boss ka bulawa aaya
main unke cabin ki or dhaya
boss ne kaha ki beta,
tune promotion to le liya hai
per apne sar per
kaanto ka taaj rekh liya hai
ab tujhe muhjhse ek waada karna hoga
kuchh bhi ho jaye, per business sabse jyada karna hoga
itna sunte hi mera aaraam karne ka plan break ho gaya
aur jab dekha agla goal-sheet to heart attack ho gaya

ye sunte hi yamraj ne kaha ki,
tune kaafi kasht bulls-eye cycle* mein saha hai
isiliye ab tu narak ke dukh ka
entitle nahi reha hai
ja swarga mein jaaker, mauj ker
sukh se to ji na saka marne ke baad to sukh ker

*target period in ICICI Prudential

Monday, September 13, 2010

Chai-Sanskriti

चाय संस्कृति

सीता और लक्षमण के साथ,
राम पहुंचे सबरी के यहाँ थोडा लेट
वो बेचारी कर रही थी,
उनका वेट
आते ही राम ने कहा की
लाओ सबरी लाओ, फिर से वो झूठे बेर खिलाओ
सबरी ने कहा की
माफ़ करे भगवन,
आया है अब नया फैसन
बस अब थोड़ी और
प्रतीक्षा की जाय
अभी बना के लाती हूँ
तीन कप चाय

CHAI SANSKRITI

sita aur lakshman ke saath
ram pahunche sabri ke yahan thoda late
wo bechari kar rehi thi
unka wait
aate hi ram ne kaha ki
lao sabri lao, phir se wo jhuthe ber khilao
sabri ne kaha ki
maaf kare bhagwan,
aaya hai ab naya faishon
bas ab thori aur
pratiksha ki jaay
abhi bana ke lati hun
teen cup chai..